बी.एस.एन.एल.
ने भी बाकी टंलीकॉम कंपनियों की राह पर चलते हुए 31 दिसंबर व 01 जनवरी
को 'ब्लैक आउट डे' घोषित कर दिया है यानि कोई भी एस.एम.एस. और फोन कॉल
रियायती दरों पर नहीं होगी। मैं इस नितांत पूंजीवाद कदम की भर्त्सना
करता हूं और विरोध स्वरूप अपने सभी मित्रों/ शुभचिंतकों/ परिजनों को
अभी से नव वर्ष की शुभकामनायें देता हूं। वैसे भी किसी एक दिन में मेरा
यकीन नहीं है................01 के बजाए 02 को संदेशों का उत्तर और नव
वर्ष की शुभकामना दूंगा तो पहाड़ नहीं टूट जाएगा.................तो
जिन्हें मेरे टेलीफोन संदेश न मिले वे खफा न हों............आप सभी को
नववर्ष की शुभकामनायें...........नववर्ष आपके, आपके परिवार, देश-दुनिया
और मानवता के लिए शुभ हो, यही कामना है..................
Sunday, 6 July 2014
लद्दाख
दाे
बार लद्दाख हो आया हूं। बौद्ध कर्मकांडों एवं संघ को नजदीक से देखने का
अवसर मिला यद्यपि लद्दाख या तिब्बत में मौजूद बौद्ध धर्म अपने
वास्तविक स्वरूप से काफी अलग है। मैं इस बार कई उद्देश्यों के साथ गया
था। बौद्ध धर्म की वैज्ञानिकता एवं तार्किकता से कुछ हद तक मैं प्रभावित
रहा हूं। परंतु किसी भी धर्म के रीतिरिवाजों और कर्मकांडों को जाने
बिना किसी निष्कर्ष पर पहुचना बड़ी भूल होगी। कर्मकांड किसी भी धर्म का महत्वपूर्ण भाग होते हैं। अत: उनके रीतिरिवाजों को नजदीक से जानना इस यात्रा को एक उद्देश्य था।
मैं अपनी यात्रा में यह भी पता लगाना चाहता था कि वहां किस हद तक बौद्ध धर्म की प्राचीन शुद्धता का पालन हो रहा है और किस हद तक उनके उपदेशों को अंधविश्वास ने घेर लिया है या बौद्ध धर्म एवं बुद्ध के सिद्धांतों की बेतुकी मान्यतायें क्या हैं।
मैं यह भी जानना चाहता था कि किस हद तक बुद्ध द्वारा निर्धारित किया गया भिक्षु क्रम सामुदायिक सेवा में रत है। क्या यह क्रम सिर्फ अपने लिए तथाकथित जीवन की शुद्धता को बनाये रखने में व्यस्त है अथवा यह सामान्य जनमानस की सेवा, परामर्श या उसे आदर्श बनाने में रत है, जैसा कि भगवान बुद्ध चाहते थे।.................. इन प्रश्नों के आसपास ही होगा मेरा यात्रा वृतांत............. बस थोड़ा सा इंतजार
मैं अपनी यात्रा में यह भी पता लगाना चाहता था कि वहां किस हद तक बौद्ध धर्म की प्राचीन शुद्धता का पालन हो रहा है और किस हद तक उनके उपदेशों को अंधविश्वास ने घेर लिया है या बौद्ध धर्म एवं बुद्ध के सिद्धांतों की बेतुकी मान्यतायें क्या हैं।
मैं यह भी जानना चाहता था कि किस हद तक बुद्ध द्वारा निर्धारित किया गया भिक्षु क्रम सामुदायिक सेवा में रत है। क्या यह क्रम सिर्फ अपने लिए तथाकथित जीवन की शुद्धता को बनाये रखने में व्यस्त है अथवा यह सामान्य जनमानस की सेवा, परामर्श या उसे आदर्श बनाने में रत है, जैसा कि भगवान बुद्ध चाहते थे।.................. इन प्रश्नों के आसपास ही होगा मेरा यात्रा वृतांत............. बस थोड़ा सा इंतजार
लाल रंग का शरबत
ग्वालियर
में भी फूलबाग पर पंडाल लगाकर बुद्ध जयंती के अवसर पर हनुमान जयंती की ही
तर्ज पर चटख लाल रंग का शरबत पिलाया जा रहा है तथा माइक में 'बुद्धम शरणम
गच्छामि' जैसा कुछ बज रहा है। कोई दलित-पिछड़ा संघ ये काम कर रहा है।
यानि महात्मा बुद्ध दलित हो गए। आगे बढ़ा तो पुराने हाइकोर्ट के पास
परशुराम जयंती के अवसर का बड़ा सा पोस्टर भी ब्राहाण बंधुओं को
शुभकामनायें दे रहा है। कहीं ये भी पढ़ने में आया था कि महावीर और गौतम
बुद्ध पर क्षत्रिय समाज ने अपना होने का दावा ठोक दिया था। कृष्ण तो हैं
ही यादव और चित्रगुप्त कायस्थ................ ईश्वर को तो हमने
निपटा दिया, अब गाय, बैल, शेर, चूहा की बारी है
Does he know a mother's heart
वैसे तो किसी भी कार्य का सफलतापूर्वक पूरा होना बेहद सुखद एहसास लेकर आता है। परंतु जिस अनुवाद कार्य में मैं विगत छह माह से तल्लीन था, वह आज पूरा हुआ। इतना ही कहूंगा कि श्री अरुण शौरी की इस पुस्तक का अनुवाद कर मैं स्वयं भी गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं। इस पुस्तक के अनुवाद के बाद अरुण्ा शौरी और ज़िंदगी के बारे में मेरा नजरिया अवश्य बदला है। इस पुस्तक के माध्यम से ही मुझे इस्लाम, ईसाईधर्म, बौद्धधर्म, हिंदू धर्म, आध्यात्म के अलावा कुछ संतों की विचारधारा को नजदीक से समझने का अवसर मिला। 450 पेज की इस पुस्तक के बारे में एक पैराग्राफ में कुछ नहीं कहा जा सकता। मुझे इसके जल्द बाज़ार में आने की उम्मीद है।
बिजली
बत्ती गोल रहने के फायदे (डायरेक्ट U P से) -
1. टी वी न देख पाने के कारण आपके पास खूब समय होता है।
2. लोग बंद कमरों से निकलकर गली चौराहों पे आ जाते हैं।
3. अमूल्य बिजली बचाकर आप इस पृथ्वी को कार्बन उत्सर्जन से प्रदूषित नहीं करते।
........ लिखने को तो बहुत कुछ है पर बिन बत्ती मोबाइल भी गोल हो रहा है। बाकी बात कल सुबह इनवर्टर से मोबाइल चार्ज करके होगी। ......... जाते - जाते एक अपील - दिल्ली, गुजरात और बाकी भाग्यशाली जगहों पे रहने वाले मित्र कृपया यू पी वालों से earth hour मनाने की अपील ना करें।
1. टी वी न देख पाने के कारण आपके पास खूब समय होता है।
2. लोग बंद कमरों से निकलकर गली चौराहों पे आ जाते हैं।
3. अमूल्य बिजली बचाकर आप इस पृथ्वी को कार्बन उत्सर्जन से प्रदूषित नहीं करते।
........ लिखने को तो बहुत कुछ है पर बिन बत्ती मोबाइल भी गोल हो रहा है। बाकी बात कल सुबह इनवर्टर से मोबाइल चार्ज करके होगी। ......... जाते - जाते एक अपील - दिल्ली, गुजरात और बाकी भाग्यशाली जगहों पे रहने वाले मित्र कृपया यू पी वालों से earth hour मनाने की अपील ना करें।
अद्यतन (Latest) प्रौद्योगिकी
भौत
दु:खी हूं.................. छह महीने पहले जिस ऐंड्रायड फोन को अद्यतन
(Latest) प्रौद्योगिकी वाला मानकर खरीदा था, अब वह बूढ़ा घोषित हो गया
है........... ऐसा विकास का मॉडल भी किस काम का, जो छह महीने में आपको
बूढ़ा घोषित कर दे अौर साल डेढ़ साल में जबरदस्ती रिटायर करा
दे............. चाहूं या न चाहूं, कुछ दिन में इस माेबाइल को अलविदा
कहने को विवश हो जाऊंगा। .............. एक ये प्रौद्योगिकी है जो कंगारू
की तरह कुलांचे मार रही है और दूसरी ओर पूरा चिकित्सा विज्ञान अब भी
चंद एंटीबायोटिक पर ही र्निभर हैं................ फिर वही इंडिया और
भारत के बीच का मामला
सच्चे हिंदू
अभी -
अभी फेसबुक पर टहलते हुए पढ़ा कि एक अंग्रेज व्यापारी गीता के कुछ
श्लोक पढ़कर हिंदू धर्म से इतना प्रभावित हुआ कि अपना घरबार छोड़कर साधु
बन गया। जिन महोदय ने ये सूचना साझा की, उन्होंने यह भी लिखा कि
फेसबुक पर मौजूद सच्चे हिंदू इस पर लाइक ठोको ताकि दुनिया में हिंदू धर्म
का डंका बज जाये। ............. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मुझे इस
पोस्ट पर हंसना चाहिए या रोना............. एक अंग्रेज
धर्म का मर्म समझ गया और आप लाइक ठुकवाने में लगे हैं। दरअसल आप अपनी सोच
में इतने छोटे हो गए हैं कि केवल हिंदूओं (सच्चे वाले) से इस पर लाइक
ठोकने की अपील कर रहे हैं और स्वयं को फेसबुक पर स्वामी विवेकानंद समझ
रहे हैं। आपको ये भी समझने का शऊर नहीं है कि वो अंग्रेज क्या फेसबुक पर
लाइक ठोक कर हिंदू धर्म से प्रभावित हुआ था?........................... .....................ऐसे हिंदुओं से भगवान बचाये
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